शब्द किसे कहते हैं । शब्द के भेद, परिभाषा, उदाहरण

सुप्रभात दोस्तों! आज भी वादे के मुताबिक हम आपके लिए हिंदी व्याकरण के एक ऐसे विषय पर संक्षिप्त लेख लेकर प्रस्तुत हुए हैं।  जिसे पूरी हिन्दी का “आधार” कहा जाता है। शब्द एक ऐसा विषय है। इसकी पूर्ण जानकारी के बिना मनुष्य बातचीत नहीं कर सकते। आमतौर की रोज़ाना जिन्दगी में शब्दों के बिना वार्तालाप करना असंभव है, इसलिए आज का विषय है “शब्द किसे कहते हैं इसके कितने भेद हैं”।

आइये अब जानते हैं शब्द की परिभाषा के बारे में।

शब्द किसे कहते है?

वर्णों के सार्थक मेल को शब्द कहते हैं। वर्णों के मेल का अर्थ निकलने पर ही वह शब्द बनता है। अगर हमें सरल तरीके से समझना हो तो उसे बता सकते हैं। जैसे कई जुड़े हुए वर्गों का जो मेल बनता है उसे शब्द कहते हैं।  यदि इन वर्णों के मेल का कोई उचित मेल ना बने तो यह मेल शब्द नहीं होंगे क्योंकि इसका कोई अर्थ नहीं है।

अब शब्द की परिभाषा के बाद हम आपको शब्द के भेदों से परिचित कराने जा रहे हैं।

शब्द के चार मुख्य भेद होते हैं

1 व्युत्पत्ति के आधार पर शब्द भेद

2 उत्पत्ति के आधार पर शब्द भेद

3 प्रयोग के आधार पर शब्द भेद

4 अर्थ की दृष्टि से शब्द भेद

1 व्युत्पत्ति यानी बनावट के आधार पर शब्द के निम्न तीन भेद होते हैं:-

रूढ़, यौगिक तथा योगरूढ़।

आइए अब संक्षेप में तीनों वेदों के बारे में जान लेते हैं।

रूढ़ शब्द- ऐसे शब्द जो अन्य किसी शब्दों के योग से ना बने हो और किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते हो परंतु जिनके टुकड़ों का कोई अर्थ नहीं होता वह रूढ़ शब्द कहलाते हैं। जैसे: कल, पर इत्यादि। इनमें क,ल,प,र का टुकड़े करने पर कुछ अर्थ नहीं है इसलिए यह निरर्थक है।  यौगिक शब्द- जो शब्द कई सार्थक शब्दों के मेल से बने हो वह यौगिक शब्द कहलाते हैं। जैसे: हिमालय, देवदूत। हिम+आलय और देव+दूत यह सारे ही शब्दों सार्थक शब्दों के मेल से बने हैं।

योगरूढ़ शब्द- वे शब्द जो योगिक तो है परंतु साधारण अर्थ को ना प्रकट करके किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं योगरूढ़ शब्द कहलाते हैं। जैसे: पंकज, दशानन। पंकज का अर्थ कीचड़ में उत्पन्न होने वाला सामान्य अर्थ ना होकर कमल के अर्थ में रूढ़ हो गया है, ठीक उसी प्रकार दशानन दस मुख वाले रावण के रूप में प्रसिद्ध होकर रूढ़ हो गया है, इसलिए इनके अर्थ साधारण ना होकर विशेष हो गए हैं।

2 उत्पत्ति के आधार पर शब्द के चार भेद होते हैं:-

तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज।

अब हम इन चारों वेदों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

तत्सम शब्द- जो शब्द संस्कृत से आए हैं और उनका प्रयोग अपने मूल रूप में ही हिंदी में भी होता है उसे तत्सम शब्द कहते हैं। जैसे: अग्नि, सूर्य आदि।

तद्भव शब्द- वे शब्द जो आए तो संस्कृत से हैं परंतु हिंदी में भी वह कुछ परिवर्तन के साथ प्रयोग किए जाते हैं उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं। जैसे: आग, सूरज इत्यादि।

देशज- जो शब्द हमारी बोलचाल की साधारण भाषा में प्रसिद्ध है और वह भारत में ही प्रचलित अन्य बोलियों से  लिए गए हैं वे शब्द देशज कहलाते हैं। जैसे: झाड़ू, खिड़की आदि।

विदेशज- वे शब्द जो हमारे देश के ना होकर किसी भी विदेशी भाषा से हिंदी में लिए गए हैं विदेशज शब्द कहलाते हैं। जैसे: इशारा, पुलिस आदि।

3 प्रयोग के आधार पर शब्द के दो भेद होते हैं:-

विकारी और अविकारी शब्द।

विकारी शब्द- जिन शब्दों का रूप परिवर्तन वाक्यों में होता रहता है विकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे: मैं, मुझे, मेरा, अच्छा, अच्छे इत्यादि।

विकारी शब्द के भी चार भेद होते हैं, संज्ञा सर्वनाम विशेषण और क्रिया। अविकारी शब्द- जिन शब्दों के रूप में कभी कोई किसी तरीके का परिवर्तन नहीं होता भी अविकारी शब्द कहलाते हैं। जैसे: यहां, इधर, किंतु इत्यादि। अविकारी शब्द के भी चार भेद होते हैं, क्रिया विशेषण संबंधबोधक समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक।

अब हम विकारी शब्दों के जितने भेद हैं सब की परिभाषा उदाहरण सहित आपको विस्तार पूर्वक बताते हैं।

संज्ञा- किसी भी नाम, जगह और व्यक्ति विशेष बताने वाले शब्दों को हम संज्ञा कहते हैं। उदाहरण: राम, भरत, भालू, और हिमालय।

सर्वनाम- जो शब्द किसी भी संज्ञा के बदले आते हैं उसे हम सर्वनाम कहते हैं। उदाहरण: मैं, तुम, और वह।

क्रिया- ऐसे शब्द से किसी कार्य का करना या होना पता चले उसे हम क्रिया कहते हैं। उदाहरण: उठाया, गया, खेला, रोया।

विशेषण- जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है उसे विशेषण कहते हैं। उदाहरण: अच्छी लड़की, नई कलम, और सुंदर मंदिर।

अब आपको अविकारी शब्दों के कितने भेद हैं उन सब की परिभाषा उदाहरण सहित बताते हैं।

क्रिया विशेषण- ऐसे शब्द जो हमें क्रिया की विशेषता बताते हैं उसे हम क्रिया विशेषण कहते हैं। उदाहरण: धीरे-धीरे, जल्दी-जल्दी।

संबंधबोधक- ऐसे शब्द संबंधबोधक कहलाते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम का संबंध व्याख्या के अन्य शब्दों के साथ बताते हैं। उदाहरण: के अनुसार, के आगे, के कारण।

समुच्चयबोधक- दो शब्दों या व्यक्तियों को जोड़ने वाले संयोजक शब्द को समुच्चयबोधक कहते हैं। उदाहरण: और, अगर इत्यादि।

विस्मयादिबोधक- ऐसे शब्द जो भावनाओं को प्रकट करते हैं उन्हें विस्मयादिबोधक कहा जाता है। जैसे: अरे, ओ, शाबाश।

4 अर्थ की दृष्टि से शब्द के दो भेद होते हैं:-

सार्थक और निरर्थक।

अब हम आपको इन दोनों भेदों की परिभाषा भी बताने वाले हैं।

सार्थक शब्द- ऐसे शब्द जो निश्चित अर्थ का बोध कराते हैं उसे सार्थक शब्द कहते हैं। जैसे: घर, नीचे, रात।

निरर्थक शब्द- जिस शब्द का कोई अर्थ निकल कर ना आता हो उसे निरर्थक शब्द कहते हैं। जैसे: चप, लप, मट। 

अंतिम विचार

आज हमने शब्द के ऊपर पूरी तरह तरह की जानकारी देने का प्रयास किया है अगर आपको पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले और कहीं कमी लग रही हो तो कृपया कमेंट करके बताएं।

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